रोमांचक त्रिउंड ट्रेक की सम्मोहक यात्रा!

हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियां हमेशा से ही देश-विदेश के पर्यकों को अपनी ओर खींच ले जाती है। इन पर्यटकों और यात्रियों में कई ऐसे भी लोग होते हैं जिन्हें रोमांचक सफ़र का बहुत ज़्यादा शौक होता है।
अपनी हर यात्रा में हर क्षेत्र में वे कोइ न कोई रोमांचकारी कार्य ढूंढ ही लेते हैं। और अगर आप रोमांच के शौक़ीन होने के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश की यात्रा पर हैं तो फिर इससे अच्छी बात और क्या होगी।

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ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों, वादियों से घिरा प्रकृति का मनोरम दृश्य लोगों के मन में एक अलग एहसास जगाता है। जहाँ नज़र घुमाओ वहीं प्रकृति की खूबसूरती एक नए नज़रिये से देखने को मिलती है। इन्हीं खूबसूरती के बीच कितना मज़ेदार होगा एक ट्रेकिंग वाला सफर, है ना? जी हाँ आज हम यहाँ आपको ले जाने वाले हैं ऐसे ही एक खूबसूरत ट्रेकिंग पर जो आपकी हिमाचल की यात्रा में एक नए अनुभव और उत्साह को और रंगीन बनायेगी।

ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों, वादियों से घिरा प्रकृति का मनोरम दृश्य लोगों के मन में एक अलग एहसास जगाता है। जहाँ नज़र घुमाओ वहीं प्रकृति की खूबसूरती एक नए नज़रिये से देखने को मिलती है। इन्हीं खूबसूरती के बीच कितना मज़ेदार होगा एक ट्रेकिंग वाला सफर, है ना? जी हाँ आज हम यहाँ आपको ले जाने वाले हैं ऐसे ही एक खूबसूरत ट्रेकिंग पर जो आपकी हिमाचल की यात्रा में एक नए अनुभव और उत्साह को और रंगीन बनायेगी।

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आज चलेंगे हम त्रिउंड के ट्रेकिंग पर। त्रिउंड, हिमाचल प्रदेश का ऐसा ट्रेकिंग सफ़र है जो हर एक रोमांच पसंद करने वालों को अपनी ओर आकर्षित करता है। झरनों पहाड़ों के साथ होता हुआ यह ट्रेकिंग सफ़र आपको प्रकृति के हर रंग से रूबरू कराता है।

तो चलिए करते हैं त्रिउंड की रोमांचक यात्रा वहां की कुछ खूबसूरत और उत्साहित करती तस्वीरों के साथ।

त्रिउंड, हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिले में स्थित एक छोटे से हिल स्टेशन के रूप में जाना जाता है, जो धर्मकोट हिल स्टेशन का ही एक भाग है। धौलाधार पर्वत की तलहटी पर बसा यह क्षेत्र लगभग 2,828 मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ है।

त्रिउंड ट्रेक का यह सफ़र शुरू होता है मेकलॉडगंज से जो तिब्बत की निर्वासित सरकार की राजधानी है। बौद्ध मठों और बौद्ध भिक्षुओं की इस नगरी से ही खुलता है त्रिउंड का रास्ता। त्रिउंड ट्रेक मेकलॉडगंज से होते हुए गालु मंदिर से 6 किलोमीटर की दूरी से आरम्भ होता है।

इस पूरे ट्रेक के दौरान आपको सुनाई देती है बौद्ध मठों की घंटियों की मधुर ध्वनि, जो धुंध और नीचे उतर आए बादलों की सतह पर तैरती प्रतीत होती है।

मेकलॉडगंज के सबसे बड़े आकर्षण हैं भगसू फॉल्स और यहाँ का भगसू मंदिर। ठीक इसी झरने के ऊपर से शुरू होता है ‘त्रिउंड ट्रेक’ का रोमांचक सफ़र।

ब्रिटिश काल की यह ऐतिहासिक जगह त्रिउंड चोटी पर घास का एक खुला मैदान है। यह चारों ओर बर्फ से ढके धौलाधार के पहाड़ों से घिरा है।

यह हरे-हरे घास और चारागाह की एक बड़ी भूमि है। यह एक दिन का ट्रेक आपको ऐसे अनुभव का एहसास कराएगा जो आपने कभी सोचा भी नहीं होगा।

इस ट्रेकिंग के दौरान आपको रास्ते में कई दुकान मिल जायेंगे जहाँ आपके पेट भरने का जैसे मैगी और दाल चावल का अच्छा बंदोबस्त होगा।

कई जगहों पर चढ़ाई के दौरान आपको यहाँ सीधी चढ़ाई मिलेगी जहाँ आपके पैर फिसलने का खतरा भी होगा। इसलिए आप आराम आराम से ही अपनी इस ट्रेकिंग के सफर को आगे बढ़ाएं।

खूबसूरत पगडंडियों से होकर गुजरता रास्ता आपको हर क्षण उत्साह से भर देता है और आपकी खूबसूरत मंज़िल के और करीब ले जाता है।

छोटी छोटी पगडंडियों को पार कर एक ऊंचाई पर पर्वतों के बीच पहुँचने का एक अलग एहसास आपको मिलेगा जो शायद ही आपने कभी अनुभव किया हो। प्रकृति से आपका प्यार का रिश्ता इस ट्रेक के दौरान और गहराता जायेगा।

प्रकृति की गोद में समा सूरज के साथ छुपाछिपी का खेल खेलना भी यहाँ की मज़ेदार क्रियाओं में शामिल होता है। सूरज की अपनी पूरी चमक के साथ दिखना फिर छुप जाना यहाँ के सबसे बेशकीमती नज़ारों में से के है।

बादलों का घने जंगलों के साथ खेलना प्रकृति की मासूम खूबसूरती को बयां करता हुआ आपको राहत का एहसास दिलाता है। खूबसूरत बादलों को और करीब से जानना कैसा होता है यहाँ पहुँचते ही आपका यह सुखद एहसास भी पूरा हो जाता है।

ट्रेक के दौरान पहले के कुछ घंटे तो आपके लिए मज़ेदार और खूबसूरत अनुभव होंगे। पर अंतिम कुछ क्षण जब चढ़ाई थोड़ी सी कठिन होती है, कुछ प्राकृतिक अड़चनों का सामना करना होता है।

त्रिउंड ट्रेक की ऊंचाई पर पहुँचने से पहले आपको 22 घुमावदार श्रेणियों को पार करना होगा। ये 22 घुमावदार श्रेणियां इस ट्रेक को थोड़ा कठिन तो बना देती हैं पर ऊँचाई पर पहुँचने के बाद ये सारी चीजें आपको लुभावनी और प्यारी लगने लगती हैं।

इस रोमांचक ट्रेक को पूरा करने के लिए आपको इन 22 अड़चनों को पूरा करना ही होता है जो अपको एक विजय प्राप्त करने का सुखद एहसास दिलाते हैं।

जब आप थकते हांफते त्रिउंड ट्रेक के असली और अंतिम पड़ाव पर पहुँच जाएंगे, वहां के खूबसूरत परिदृश्य को देख आपकी सारी थकान पल भर में छू मंतर हो जाएगी। वादियों की गोद में पहुँच आप उसकी सुंदरता को सराहने में इतने मशगूल हो जायेंगे कि आपको आपकी यात्रा की थकान भी याद नहीं रहेगी।